नई दिल्ली। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में रविवार को हुए कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने तीन तलाक मामले पर कहा, ''कुछ राजनीतिक पार्टियों को वोट बैंक की आदत पड़ गई थी। तुष्टिकरण की राजनीति के चलते तीन तलाक इतने साल तक चलता रहा। जब हम पूरे समाज की परिकल्पना लेकर चलते हैं तो हमें संवेदनाओं के बारे में सोचना पड़ता है।’’
शाह ने कहा, ''वोटों के लालच में तुष्टिकरण जरूरी नहीं है। जो पिछड़ा है, गरीब है उसे साथ लेकर चलना पड़ता है। गरीब कोई भी हो उसका धर्म नहीं होता है। विकास ही उसे मुख्यधारा में सामने लाकर खड़ा करता है। तुष्टिकरण भारत के विभाजन का कारण बना था। वोट बैंक की वजह से देश के विकास में बाधा आई।''
उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि जनता ने मोदीजी को दूसरी बार पूर्ण बहुमत देकर तुष्टिकरण की राजनीति को पूरी तरह से खत्म कर दिया। उसी बहुमत के आधार पर एनडीए सरकार तीन तलाक को खत्म कर पाई है। लोग दुहाई देते हैं कि तीन तलाक शरियत का हिस्सा है।
शाह ने कहा, ‘‘हमें कांग्रेस के तुष्टिकरण को खत्म करने में 56 साल लग गए। अगर यह कुरान का हिस्सा होता तो दुनिया के मुस्लिम देश इसे क्यों हटाते? मोदी सरकार ने अब मुस्लिम माताओं-बहनों को तीन तलाक से मुक्ति दिलाई है। कई लोग आरोप लगाते हैं कि हमने मुस्लिम विरोधी काम किया। मैं साफ करना चाहता हूं कि तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम समाज की महिलाओं को समानता का अधिकार मिलेगा।''
''अगर इस कुप्रथा को नहीं हटाते तो यह भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा धब्बा होता। शाह बानो ने तीन तलाक को कोर्ट में चुनौती दी थी। तब कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया था। उस दौरान राजीव गांधी की बहुमत वाली सरकार थी और सरकार ने संसद में कानून बनाकर शीर्ष अदालत के फैसले को बदल दिया।''
शाह ने कहा, ''राजीव गांधी की सरकार में मंत्रिपद छोड़कर आरिफ मोहम्मद खान तीन तलाक के खिलाफ अभियान में शामिल हो गए थे। ये लड़ाई जारी रही और शायरा बानो ने स्पीड पोस्ट से तलाक मिलने पर कोर्ट से गुहार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गैर-संवैधानिक और गैर-इस्लामिक करार दिया। शायरा को मुस्लिम कट्टरपंथियों का विरोध झेलना पड़ा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष कहता है कि जब किसी को जेल हो जाएगी तो वह मुआवजा कैसे देगा। गुलाम नबी आजाद से कहना चाहता हूं कि आप तो मुस्लिम हैं, पता नहीं है क्या तीन तलाक में मुआवजे का प्रावधान ही नहीं था।''
शाह ने कहा, ''वोटों के लालच में तुष्टिकरण जरूरी नहीं है। जो पिछड़ा है, गरीब है उसे साथ लेकर चलना पड़ता है। गरीब कोई भी हो उसका धर्म नहीं होता है। विकास ही उसे मुख्यधारा में सामने लाकर खड़ा करता है। तुष्टिकरण भारत के विभाजन का कारण बना था। वोट बैंक की वजह से देश के विकास में बाधा आई।''
उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि जनता ने मोदीजी को दूसरी बार पूर्ण बहुमत देकर तुष्टिकरण की राजनीति को पूरी तरह से खत्म कर दिया। उसी बहुमत के आधार पर एनडीए सरकार तीन तलाक को खत्म कर पाई है। लोग दुहाई देते हैं कि तीन तलाक शरियत का हिस्सा है।
शाह ने कहा, ‘‘हमें कांग्रेस के तुष्टिकरण को खत्म करने में 56 साल लग गए। अगर यह कुरान का हिस्सा होता तो दुनिया के मुस्लिम देश इसे क्यों हटाते? मोदी सरकार ने अब मुस्लिम माताओं-बहनों को तीन तलाक से मुक्ति दिलाई है। कई लोग आरोप लगाते हैं कि हमने मुस्लिम विरोधी काम किया। मैं साफ करना चाहता हूं कि तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम समाज की महिलाओं को समानता का अधिकार मिलेगा।''
''अगर इस कुप्रथा को नहीं हटाते तो यह भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा धब्बा होता। शाह बानो ने तीन तलाक को कोर्ट में चुनौती दी थी। तब कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया था। उस दौरान राजीव गांधी की बहुमत वाली सरकार थी और सरकार ने संसद में कानून बनाकर शीर्ष अदालत के फैसले को बदल दिया।''
शाह ने कहा, ''राजीव गांधी की सरकार में मंत्रिपद छोड़कर आरिफ मोहम्मद खान तीन तलाक के खिलाफ अभियान में शामिल हो गए थे। ये लड़ाई जारी रही और शायरा बानो ने स्पीड पोस्ट से तलाक मिलने पर कोर्ट से गुहार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गैर-संवैधानिक और गैर-इस्लामिक करार दिया। शायरा को मुस्लिम कट्टरपंथियों का विरोध झेलना पड़ा।’’
हमने मुस्लिम महिलाओं के हक में फैसला किया: शाहउन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस बार राजीव गांधी नहीं नरेंद्र मोदी की सरकार थी और हमने मुस्लिम महिलाओं के हक में फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर यह कुरान के खिलाफ है तो मुस्लिमों के हक में कैसे हो सकता है।''
शाह ने कहा- लोग तीन तलाक से पहले परिवार से बात करेंगेशाह ने कहा, ''मैं बतौर हिंदू मानता हूं कि सती प्रथा और दहेज समाज में कुप्रथा बन चुके थे। हमने इसे भी खत्म किया। नाबालिगों का विवाह कराने पर सख्त सजा का प्रावधान किया है। हमारा कानून शिक्षा देने के लिए है, लोगों के मन में डर रहता है कि ऐसा नहीं करना है। लोग तीन तलाक से पहले परिवार के साथ बैठकर बात करेंगे। मतभेद सुलझाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष कहता है कि जब किसी को जेल हो जाएगी तो वह मुआवजा कैसे देगा। गुलाम नबी आजाद से कहना चाहता हूं कि आप तो मुस्लिम हैं, पता नहीं है क्या तीन तलाक में मुआवजे का प्रावधान ही नहीं था।''