मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व को एक बार फिर एक्टिव मैनेजमेन्ट अवार्ड हासिल हुआ है। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने आज नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में यह अवार्ड पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति को प्रदान किया। उत्कृष्ट प्रबंधन का यह सम्मान मिलने से पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी व कर्मचारी जहां प्रफुल्लित हैं, वहीं पन्ना जिले के लोग भी गौरव का अनुभव कर रहे हैं।

सम्मान से पार्क के अधिकारी, कर्मचारी व पन्नावासी प्रफुल्लित
उल्लेखनीय है कि उत्कृष्ट प्रबंधन, टीम वर्क और बाघ पुनसर््थापना योजना को मिली शानदार सफलता से पन्ना टाइगर रिजर्व देश के सर्वश्रेष्ठ बाघ अभ्यारण्यों में शामिल हो गया है। जिससे पन्ना ही नहीं अपितु समूचे प्रदेश का गौरव बढ़ा है। वर्ष 2009 में यहां पर बाघों का पूरी तरह से सफाया हो जाने के बाद बाघ पुनसर्थापना योजना शुरू होने पर शासन द्वारा पन्ना टाइगर रिजर्व में आर. श्रीनिवास मूर्ति की पद स्थापना की गई थी। अपने कर्तव्य के प्रति हमेशा सजग रहने वाले ईमानदार और निष्ठावान भारतीय वन सेवा के अधिकारी श्री मूर्ति ने पन्ना टाइगर रिजर्व को एक नई पहचान और उसका पुराना गौरव वापस दिलाने के लिए जुनून की हद तक कार्य किया। उनकी मेहनत, लगन व निष्ठा देख पार्क के अधिकारी व मैदानी कर्मचारी भी प्रेरित हुए और एक ऐसी टीम तैयार हुई, जिसने रात-दिन मेहनत करके पन्ना टाइगर रिजर्व को उस मुकाम तक पहुंचा दिया कि आज देश व दुनिया में उसकी चर्चा हो रही है, कामयाबी की गाथा सुनाई जा रही है।
बाघों का खात्मा होने के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व को फिर से आबाद करने की बड़ी चुनौती फील्ड डायरेक्टर मूर्ति के सामने थी। शासन ने उनकी योग्यता व क्षमताओं को देखकर ही यहां पदस्थ किया था और वे इस कठिन परीक्षा में श्रेष्ठ अंकों के साथ न सिर्फ उत्तीर्ण हुए बल्कि कामयाबी की ऐसी मिसाल कायम कर दी कि पूरी दुनिया के बाघ विशेषज्ञों व वन्य जीव प्रेमियों का यहां तांता लगने लगा। लोग यहां आकर अध्ययन करते हैं और प्रबंधन के गुर सीखते हैं। क्षेत्र संचालक आर श्रीनिवास मूर्ति के कुशल नेतृत्व में बुन्देलखण्ड की धरती पन्ना टाइगर रिजर्व में मौजूदा समय 22 बाघ व बाघिन तथा शावक विचरण कर रहे हैं। यहां के जंगल में बाघों की दहाड़ व शावकों की किलकारी गूंजने लगी है, जिससे पन्ना का यह शानदार जंगल फिर से जीवंत हो उठा है। अब तो आलम यह है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में जन्में शावकों की दहाड़ विन्ध्यांचल के 10 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में गूंज रही है। केन से सोन नदी तक तथा केन से नर्मदा नदी तक के विस्तृत कॉरीडोर में पन्ना के बाघों ने अपनी मौजूदगी दर्ज की है।
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